टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन के ‘इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम’ से उत्तर प्रदेश में 4,500 से अधिक लोग हुए सशक्त

टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन के ‘इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम’ से उत्तर प्रदेश में 4,500 से अधिक लोग हुए सशक्त

श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में आजीविका और ज़रूरी सेवाओं को मज़बूत करने के लिए सरकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारा जा रहा है

लखनऊ, जून 10 2026: टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन के ‘इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईवीडीपी-IVDP)’ ने उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिलों—श्रावस्ती और बलरामपुर—में 4,500 से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह पहल केंद्र और राज्य
सरकार की योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर ज़मीनी स्तर पर टिकाऊ और सामुदायिक बदलाव को बढ़ावा दे रही है।
श्रावस्ती और बलरामपुर भारत के उन जिलों में शामिल हैं जहाँ विकास की चुनौतियाँ अब भी बड़ी हैं। श्रावस्ती की लगभग 74% आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है और यहाँ प्रति व्यक्ति औसत आय 42,000 रूपए के आसपास ही है। ये जिले कम साक्षरता, सीमित सिंचाई, बेरोज़गारी, कुपोषण, एनीमिया और मौसमी पलायन जैसी पुरानी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
इन कमियों को दूर करने के लिए, टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन ने आगा खान फाउंडेशन और बायफ (BAIF) के साथ साझेदारी की है। इसके तहत श्रावस्ती की खलीफतपुर और अचरौरा शाहपुर तथा बलरामपुर की तख्तरवा ग्राम पंचायतों में आईवीडीपी कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। जिला प्रशासन के साथ मिलकर कंपनी ने एक ऐसी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जो मापने योग्य सामाजिक-आर्थिक परिणामों को प्राथमिकता देती है और सामुदायिक भागीदारी व प्रशासन प्रणाली को मज़बूत करती है।
विनोद कुलकर्णी, CEO – टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हमारी साझेदारी हमारे ग्रामीण विकास के सफर में एक रणनीतिक उपलब्धि है, जिसका मकसद भारत के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक—श्रावस्ती और बलरामपुर—में आईवीडीपी मॉडल को स्थापित करना है। सामुदायिक भागीदारी और सरकार के साथ मज़बूत तालमेल के ज़रिए हमारा लक्ष्य उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के वंचित समुदायों में एक टिकाऊ बदलाव लाना है। काम शुरू होने के पहले ही साल में 4,500 से अधिक लोगों को सशक्त बनाना और सरकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारना एक उत्साहजनक कदम है। इससे आजीविका के अवसर और बेहतर प्रशासन उन लोगों के करीब पहुँच सका है, जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार, अवनीश अवस्थी ने कहा “उत्तर प्रदेश सरकार आकांक्षी जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह समर्पित है। श्रावस्ती और बलरामपुर में टाटा मोटर्स फ़ाउंडेशन के साथ हमारा सहयोग इसी विज़न को दर्शाता है। सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व की बुनियाद पर टिका आईवीडीपी कार्यक्रम, राज्य में एकीकृत ग्रामीण विकास के लिए एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में उभर रहा है। शासन के इस सफल तरीके ने हमें प्रोत्साहित किया है कि हम इस कार्यक्रम को अन्य आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में भी लागू करने पर विचार करें।”
वर्ष 2018 में शुरू किया गया इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईवीडीपी) आज ग्रामीण विकास और समुदाय की आत्मनिर्भरता का एक सफल राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है। यह कार्यक्रम 5 राज्यों की 103 ग्राम पंचायतों के करीब 200 गांवों तक पहुंच चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस पहल से 1.15 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ। साथ ही, करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की 50 सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को गांवों से जोड़ा गया, ताकि जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था और स्थानीय संस्थाएं मजबूत हों और लोगों तक सरकारी सुविधाएं और संसाधन बेहतर तरीके से पहुंच सकें। सरकारी योजनाएं तो हैं, लेकिन उनका लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचाना हमेशा आसान नहीं होता। आईवीडीपी गांवों में लोगों को इन योजनाओं से जोड़ने और उनका लाभ दिलाने में मदद करता है। यह स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने, दस्तावेजी कमियां दूर करने और गांवों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने पर काम करता है, ताकि वे लंबे समय तक अपने विकास की राह खुद आगे बढ़ा सकें।
श्रावस्ती और बलरामपुर में आईवीडीपी की प्रमुख पहलें:
● अपना सेवा केंद्र: दोनों जिलों में ‘सिंगल-विंडो’ सेंटर (एक ही छत के नीचे सभी सुविधा देने वाले केंद्र) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र वंचित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और स्थानीय प्रशासन को मज़बूत करने में मदद कर रहे हैं।
● महिला सशक्तिकरण: खेती-किसानी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें ‘माइक्रो-एंटरप्रेन्योर’ (लघु उद्यमी) बनने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।
● सोलर सिंचाई: श्रावस्ती में सौर ऊर्जा (सोलर) से चलने वाली छह सिंचाई यूनिट्स ने लगभग 200 किसानों की खेती का तरीका बदल दिया है। इससे सिंचाई की लागत एक-तिहाई से ज़्यादा कम हो गई है, हर सीज़न में लगभग 75 लीटर डीज़ल की बचत हो रही है और अब किसान साल में तीन फसलें ले पा रहे हैं।
● सोलर होम लाइटिंग: बलरामपुर में 250 से ज़्यादा परिवारों ने सोलर होम लाइटिंग को अपनाया है, जिससे मिट्टी के तेल (केरोसिन) की खपत में 90% तक की कमी आई है।

Leave a Comment