डिजिटल नारी, सशक्त नारी: वित्तीय सशक्तिकरण की राह पर सोनी की कहानी
उत्तर प्रदेश के उन्नाव की रहने वाली सोनी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल वित्त किस तरह केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को नई दिशा दे सकता है। सोनी एक जनरल स्टोर चलाने के साथ स्वयं सहायता समूह (SHG) की अध्यक्ष और समूह सखी के रूप में महिलाओं को वित्तीय सेवाओं और अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
डिजिटल सेवाओं से जुड़ने से पहले बैंकिंग कार्य उनके लिए कठिन थे। नजदीकी बैंक लगभग 15 किलोमीटर दूर था। कई बार सर्वर बंद होने के कारण उन्हें अगले दिन फिर से बैंक जाना पड़ता, व्यवसाय से जुड़ी भुगतान प्रक्रिया भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण थी।
सोनी के जीवन में बदलाव की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई, जब वह एक SGH से जुड़ीं, जिससे उन्हें ₹50,000 का पहला ऋण मिला, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति संभली। इसके बाद ₹2 लाख के ऋण से उन्होंने चार छोटी दुकानों का निर्माण कराया। आज इनमें से एक में वह अपना जनरल स्टोर चलाती हैं, और बाकी दुकानों को किराए पर देकर अतिरिक्त आय अर्जित करती हैं।
स्थानीय कार्यक्रम से जुड़े मार्गदर्शकों के सहयोग से सोनी ने UPI के माध्यम से डिजिटल भुगतान को अपनाया। आज डिजिटल लेनदेन उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
अपने व्यवसाय के अलावा सोनी अब अपने समुदाय में एक प्रेरक और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं। समूह सखी के रूप में वह महिलाओं को बैंक खाते खोलने, ऋण प्राप्त करने और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को समझने में सहायता करती हैं।
सोनी की कहानी “डिजिटल नारी, सशक्त नारी” की भावना को साकार करती है, जहाँ वित्तीय उपकरणों तक पहुंच महिलाओं को न केवल अपना भविष्य संवारने का अवसर देती है, बल्कि उन्हें दूसरों को भी नई संभावनाओं की ओर मार्गदर्शन करने में सक्षम बनाती है।







