साल में एक लंबी छुट्टी के बजाए कई छोटी यात्राएं पसंद कर रही है जेन जेड पीढ़ी: एयरबीएनबी रिपोर्ट
· 10 में से 7 जेन जेडयुवा एक लंबी सालाना छुट्टी की बजाय तीन छोटी यात्राएं करना पसंद करते हैं।
· 95% युवा चाहते हैं कि उनकी यात्रा व्यक्तिगत और अनोखी हो, न कि सामान्य या पहले से तय की गई।
· 87% का मानना है कि उनका यात्रा करने का तरीका उनके व्यक्तित्व और पहचान को दर्शाता है।
· समूह में यात्रा के दौरान आधे से अधिक युवा अलग-अलग होटल कमरों की बजाय एक साझा घर में ठहरना पसंद करते हैं।
· 4 में से 3 युवाओं के लिए गंतव्य से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वे किसके साथ यात्रा कर रहे हैं।
नई दिल्ली : 1 जून 2026: भारत की जेन जेड पीढ़ी यात्रा के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदल रही है। साल में एक लंबी छुट्टी के बजाय, अब यह पीढ़ी अपनी पसंद और अचानक बनने वाले प्लान के अनुसार यात्राओं को तरजीह दे रही है।एयरबीएनबी की नई रिपोर्ट “नेवर द सेम: द न्यू रूल्स ऑफ जेन जेड ट्रेवल इन इंडिया” के अनुसार, जेन जेड के लिए यात्रा केवल घूमने-फिरने का साधन नहीं, बल्कि अपनी पहचान और व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने का माध्यम बन चुकी है।
एयरबीएनबी के भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कंट्री हेड अमनप्रीत बजाज ने कहा, “जेन जेड के लिए यात्रा जितनी नई जगहों और अनुभवों को खोजने का माध्यम है, उतनी ही खुद को अभिव्यक्त करने का भी जरिया है। यही बात उन्हें सबसे अधिक सोच-समझकर और उद्देश्यपूर्ण तरीके से यात्रा करने वाला यात्री वर्ग बनाती है। इस पीढ़ी की खासियत यह नहीं है कि वे कितनी बार यात्रा करते हैं, बल्कि यह है कि वे यात्रा क्यों करते हैंताकि वे खुद को और बेहतर ढंग से महसूस कर सकें। एयरबीएनबी पर हम देख रहे हैं कि इस पीढ़ी के लिए यात्रा उनके जीवन के सबसे व्यक्तिगत फैसलों में से एक बन गई है। वे कहां जाते हैं, किसके साथ जाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण, कहां ठहरते हैं, इन सभी विकल्पों के जरिए वे अपनी पहचान व्यक्त करते हैं। एयरबीएनबी इसी बदलती सोच और यात्रा शैली के अनुरूप बना है। यह बदलाव भारत को नए नजरिए से देखने, समझने और खोजने के अवसरों का एक नया अध्याय खोल रहा है।”
साल में एक लंबी छुट्टी का चलन पड़ रहा फीका
कई दशकों तक भारतीयों के लिए छुट्टियों का मतलब साल में एक बड़ी यात्रा हुआ करता था, जिसकी योजना महीनों पहले बनाई जाती थी और जिसके लिए पहले से बचत की जाती थी। लेकिन जेन जेड ने इस परंपरागत सोच को पूरी तरह बदल दिया है।रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 7 जेन जेड यात्री साल में एक लंबी छुट्टी की बजाय तीन छोटी यात्राएं करना पसंद करते हैं, जबकि 87% एक सप्ताह से कम अवधि की यात्राओं को प्राथमिकता देते हैं।एयरबीएनबी के आंकड़े भी युवा भारतीयों की यात्रा संबंधी बदलती पसंद को दर्शाते हैं। गर्मियों के दौरान भारतीय जेन जेड द्वारा की गई खोजों में साल-दर-साल 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, 2 से 6 रातों की छोटी यात्राएं सबसे तेजी से बढ़ने वाला ट्रैवल फॉर्मेट बनकर उभरी हैं, जिनमें घरेलू यात्राओं के लिए लगभग 80% की बढ़ोतरी देखी गई है।
यात्रा अब इस पीढ़ी के लिए कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं रह गई है जिसकी योजना महीनों पहले बनाई जाए। इसके बजाय, यह तनाव से राहत पाने, अचानक मिले खाली वीकेंड का लाभ उठाने या किसी दोस्त के एक साधारण “चलो घूमने चलते हैं” कहने पर लिया गया सहज फैसला बन गई है।रिपोर्ट के अनुसार, 66% जेन जेड यात्री यात्रा से कुछ दिन या कुछ सप्ताह पहले ही अपनी बुकिंग करते हैं, जबकि 67% का कहना है कि उनकी कोई भी दो यात्राएं एक जैसी नहीं रही हैं।यानी, साल में एक बार होने वाली छुट्टी का चलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब वह कई छोटी, विविध और अधिक जीवंत यात्राओं के रूप में बदल गया है, जो हर बार एक नया अनुभव लेकर आती हैं।








